कभी कुछ ख्वाब देखे थे मैने
रहेंगे हम उनके संग
ना हासिल हुआ उनका साथ
ना रेह पाये सफर मैं कभी हम
जुनून सा था दिल मैं
फितूर था दिमाग का
कुछ ….केह गये मुझसे
पर समझा नहीं कभी
आज जल रहा है सीना
दूरी सही नहीं जाती
जानते हैं कभी करीब ना आ सकेंगे
कट रही है ज़िंदगी बस याद मैं
और कोई खुस है अपनी ज़िंदगी के सौगात मैं.
रहेंगे हम उनके संग
ना हासिल हुआ उनका साथ
ना रेह पाये सफर मैं कभी हम
जुनून सा था दिल मैं
फितूर था दिमाग का
कुछ ….केह गये मुझसे
पर समझा नहीं कभी
आज जल रहा है सीना
दूरी सही नहीं जाती
जानते हैं कभी करीब ना आ सकेंगे
कट रही है ज़िंदगी बस याद मैं
और कोई खुस है अपनी ज़िंदगी के सौगात मैं.
Very nice...Poetry in prose and prose in poetry...waah waah....
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